यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) क्या है?
यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income – UBI) एक सामाजिक-आर्थिक प्रस्ताव है जिसके तहत एक राज्य या सरकार अपने सभी नागरिकों को, बिना किसी शर्त या कार्य-प्रतिफल के, एक नियमित और निश्चित राशि प्रदान करती है। इसका उद्देश्य आय की एक न्यूनतम गारंटी सुनिश्चित करना है ताकि हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें। यह अवधारणा पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं से भिन्न है, जो आमतौर पर आय, रोजगार की स्थिति, या अन्य शर्तों पर निर्भर करती हैं। यूबीआई के तीन मुख्य सिद्धांत हैं: यह यूनिवर्सल (सार्वभौमिक) हो, अनकंडीशनल (बिना शर्त) हो, और कैश (नकद) के रूप में दिया जाए।
यूबीआई के ऐतिहासिक और दार्शनिक आधार
यूबीआई का विचार नया नहीं है। 16वीं शताब्दी में सर थॉमस मोर ने अपनी पुस्तक ‘यूटोपिया’ (1516) में एक समान विचार प्रस्तुत किया था। 18वीं शताब्दी में, अमेरिकी क्रांतिकारी थॉमस पेन ने अपने ग्रंथ ‘एग्रेरियन जस्टिस’ (1797) में ‘नागरिक लाभांश’ का प्रस्ताव रखा। 20वीं शताब्दी में, अर्थशास्त्री और दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल और मिल्टन फ्रीडमैन (जिन्होंने ‘नेगेटिव इनकम टैक्स’ का विचार दिया) जैसे विचारकों ने इस पर चर्चा को आगे बढ़ाया। यूरोप में, इस विचार को बेल्जियम के दार्शनिक और अर्थशास्त्री फिलिप वैन पैरिज ने अपनी पुस्तक ‘रीयल फ्रीडम फॉर ऑल’ (1995) के माध्यम से लोकप्रिय बनाया।
यूरोप में यूबीआई चर्चा का संदर्भ: सामाजिक राज्य और तकनीकी बदलाव
यूरोप, विशेष रूप से स्कैंडिनेवियाई देश और पश्चिमी यूरोप, लंबे समय से मजबूत सामाजिक कल्याण प्रणालियों के गढ़ रहे हैं। जर्मनी का सोशल मार्केट इकोनॉमी, फ्रांस की सिक्योरिटी सोशल, और यूनाइटेड किंगडम की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) इसके उदाहरण हैं। हालाँकि, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और गिग इकॉनमी के उदय ने रोजगार के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। संगठनों जैसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और ओईसीडी (OECD) ने चेतावनी दी है कि रोबोटिक्स और एआई से बड़े पैमाने पर नौकरियों का विस्थापन हो सकता है। इस पृष्ठभूमि में, यूबीआई को एक संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है जो सामाजिक सुरक्षा के जाल को सरल बनाता है और लोगों को बदलती अर्थव्यवस्था में समायोजित होने का अवसर देता है।
यूरोप में प्रमुख यूबीआई प्रयोग और पायलट परियोजनाएँ
सैद्धांतिक बहस से आगे बढ़कर, यूरोप के कई देशों और शहरों ने यूबीआई के प्रभावों को समझने के लिए व्यावहारिक पायलट परियोजनाएँ शुरू की हैं। ये प्रयोग सीमित समय और सीमित आबादी के लिए होते हैं, ताकि डेटा एकत्र किया जा सके।
फिनलैंड का ऐतिहासिक प्रयोग (2017-2018)
फिनलैंड का यूबीआई प्रयोग दुनिया भर में सबसे चर्चित रहा है। इसे फिनिश सरकार के सामाजिक सुरक्षा संस्थान केला (Kela) ने जनवरी 2017 से दिसंबर 2018 तक चलाया। इस प्रयोग में बेरोजगारी लाभ प्राप्त कर रहे 2,000 यादृच्छिक रूप से चुने गए लोगों को प्रति माह 560 यूरो (लगभग 50,000 रुपये) बिना किसी शर्त के दिए गए। यदि उन्हें नौकरी मिल जाती या आय होने लगती, तब भी यह राशि मिलती रही। इसका प्राथमिक लक्ष्य रोजगार प्रोत्साहन पर प्रभाव देखना था। परिणामों से पता चला कि प्राप्तकर्ताओं का मानसिक तनाव कम हुआ, उनमें आत्मविश्वास बढ़ा, और उन्होंने छोटे-मोटे काम करने में अधिक सक्रियता दिखाई, हालाँकि पूर्णकालिक रोजगार दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
स्पेन का राष्ट्रीय स्तर का प्रयोग: ‘मिनिमो वाइटल’ (2020-वर्तमान)
कोविड-19 महामारी के आर्थिक झटके के जवाब में, स्पेन की सरकार ने यूबीआई जैसी एक महत्वाकांक्षी योजना ‘इंग्रेसो मिनिमो वाइटल’ (Minimum Vital Income – IMV) शुरू की। यह योजना मई 2020 में लागू हुई और इसका उद्देश्य देश के सबसे गरीब 850,000 परिवारों (लगभग 2.5 मिलियन लोग) को आय का न्यूनतम स्तर प्रदान करना है। यह बिना शर्त नहीं है, बल्कि आय और संपत्ति के आधार पर पात्रता तय होती है, लेकिन यह एक स्थायी, राष्ट्रीय, कानूनी गारंटी वाली आय सहायता है। इसका प्रशासन स्पेनिश सोशल सिक्योरिटी करती है और यह यूरोप में अपनी तरह की सबसे बड़ी योजना है।
नीदरलैंड्स के नगर प्रयोग: उट्रेच और अन्य शहर
नीदरलैंड्स में कई नगर पालिकाओं ने अपने सामाजिक सहायता कानूनों के तहत प्रयोग किए। उट्रेच (Utrecht) शहर ने 2017 में एक प्रयोग शुरू किया जिसमें विभिन्न समूहों को अलग-अलग शर्तों के साथ लाभ दिया गया। एक समूह को पूर्ण यूबीआई (बिना शर्त) मिला, जबकि अन्य को कुछ शर्तों के साथ। वैगेनिंगन (Wageningen), टिलबर्ग (Tilburg), और ग्रोनिंगन (Groningen) ने भी ऐसे ही पायलट चलाए। इन प्रयोगों का फोकस लोगों के व्यवहार, रोजगार की इच्छा और सामाजिक भागीदारी पर था। नतीजे बताते हैं कि बिना शर्त लाभ पाने वालों ने स्वयंसेवी कार्यों और समुदाय सेवा में अधिक भाग लिया।
जर्मनी का निजी पहल से प्रयोग: ‘माई ग्राउंडइनकम’ (2021-वर्तमान)
यह एक अनोखा, निजी तौर पर वित्तपोषित दीर्घकालिक अध्ययन है, जिसका आयोजन एक गैर-लाभकारी संस्था ‘माई ग्राउंडइनकम’ (Mein Grundeinkommen) कर रही है। इसने एक लॉटरी के माध्यम से चुने गए 120 से अधिक लोगों को तीन वर्षों के लिए प्रति माह 1,200 यूरो (लगभग 1.08 लाख रुपये) का बिना शर्त भुगतान देना शुरू किया। प्रतिभागियों का चयन जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च (DIW Berlin) और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोन के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। यह अध्ययन मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित है। प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि प्राप्तकर्ताओं ने कम तनाव, बेहतर निर्णय क्षमता और दीर्घकालिक योजना बनाने की क्षमता में वृद्धि दर्ज की है।
स्कॉटलैंड की तैयारी: ग्लासगो और एडिनबर्ग में योजना
स्कॉटलैंड में, स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP) सरकार यूबीआई पायलट शुरू करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। ग्लासगो और एडिनबर्ग जैसे शहरों को संभावित स्थलों के रूप में चिन्हित किया गया है। स्कॉटिश सरकार ने यूरोपीय संघ के सामाजिक नवाचार कोष से फंडिंग की मांग की थी, लेकिन ब्रिटिश सरकार से कानूनी अधिकारों को हस्तांतरित करने की आवश्यकता इस योजना में बाधक बनी हुई है।
यूरोपीय प्रयोगों के प्रमुख निष्कर्ष और आँकड़े
विभिन्न पायलटों से प्राप्त आँकड़ों और रिपोर्टों ने यूबीआई के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं, जो अक्सर आम धारणाओं से अलग हैं।
रोजगार पर प्रभाव: ‘आलसीपन’ का मिथक टूटता
सबसे बड़ी आशंका यह थी कि यूबीआई लोगों को काम करने से रोकेगा। फिनलैंड के प्रयोग से पता चला कि यूबीआई प्राप्तकर्ताओं और नियंत्रण समूह के बीच रोजगार दर में कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं था। हालाँकि, यूबीआई प्राप्तकर्ताओं ने अपने कल्याण और जीवन संतुष्टि में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। दूसरे शब्दों में, पैसा मिलने से लोगों ने काम छोड़ा नहीं, बल्कि उन्होंने बेहतर नौकरियाँ तलाशने या शिक्षा लेने के लिए समय निकाला।
मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार
लगभग सभी प्रयोगों में यह एक सुसंगत निष्कर्ष रहा। फिनलैंड में, प्राप्तकर्ताओं ने तनाव, चिंता, अवसाद और थकान के स्तर में कमी बताई। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन और आत्मविश्वास में भी सुधार महसूस किया। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण था जो पहले से ही असुरक्षित आर्थिक स्थिति में थे।
सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की दक्षता
यूबीआई की एक प्रमुख दलील प्रशासनिक सरलता है। वर्तमान कल्याणकारी योजनाएँ, जैसे जर्मनी की हार्ट्ज़-IV योजना या यूके की यूनिवर्सल क्रेडिट, जटिल आवेदन प्रक्रियाओं और नौकरशाही से भरी हैं। यूबीआई एक सरल, स्वचालित भुगतान हो सकता है जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम हो और प्रशासनिक लागत घटे। नीदरलैंड्स के प्रयोगों ने इस ओर संकेत दिया है।
रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा
आर्थिक असुरक्षा से मुक्ति लोगों को जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। कई रिपोर्टों में पाया गया कि यूबीआई प्राप्तकर्ताओं ने छोटा व्यवसाय शुरू करने, नए कौशल सीखने, या रचनात्मक परियोजनाओं पर काम करने की अधिक संभावना दिखाई। यह ऑस्ट्रिया और जर्मनी के कलाकारों और फ्रीलांसरों के बीच विशेष रूप से स्पष्ट था।
| प्रयोग / देश | अवधि | प्रतिभागी संख्या | मासिक राशि (लगभग) | प्रमुख निष्कर्ष |
|---|---|---|---|---|
| फिनलैंड (केला) | 2017-2018 | 2,000 | 560 यूरो | मानसिक स्वास्थ्य में सुधार; रोजगार दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| स्पेन (IMV) | 2020-वर्तमान | ~2.5 मिलियन | विविध (आय के अनुसार) | गरीबी में कमी; एक स्थायी राष्ट्रीय सुरक्षा जाल |
| नीदरलैंड्स (उट्रेच) | 2017-2019 | कई सौ | विविध | स्वयंसेवी कार्यों में वृद्धि; प्रशासनिक सरलता |
| जर्मनी (माई ग्राउंडइनकम) | 2021-2024 | 120+ | 1,200 यूरो | तनाव में कमी; दीर्घकालिक योजना में सुधार |
| पुर्तगाल (लिस्बन पायलट)* | प्रस्तावित | 5,000 (योजना) | अनिर्धारित | स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर फोकस |
* पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन ने एक सीमित पायलट की योजना बनाई है, जो अभी शुरू नहीं हुई है।
यूरोप में यूबीआई के समर्थन और विरोध के तर्क
यूरोप में यूबीआई पर बहस गहन और बहुआयामी है, जिसमें राजनीतिक स्पेक्ट्रम के विभिन्न धड़े अलग-अलग कारणों से इसका समर्थन या विरोध करते हैं।
समर्थन में तर्क
- गरिमा और स्वतंत्रता: स्विट्जरलैंड के दार्शनिक डेनियल स्ट्रेब जैसे विचारकों का मानना है कि यूबीआई व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा की नींव रखता है, जिससे लोग ऐसे काम करने के लिए मजबूर नहीं रह जाते जो वे नहीं करना चाहते।
- ऑटोमेशन का जवाब: यूरोपीय संसद के कुछ सदस्य, विशेष रूप से ग्रीन पार्टी और लेफ्ट ग्रुप से, यूबीआई को तकनीकी बेरोजगारी से निपटने के तरीके के रूप में देखते हैं।
- सामाजिक न्याय: समर्थकों का तर्क है कि यह धन के असमान वितरण और पेरिस, बर्लिन, या लंदन जैसे शहरों में बढ़ती असमानता को कम करने में मदद कर सकता है।
- श्रम बाजार का आधुनिकीकरण: यह गिग इकॉनमी (उबर, डिलिवरू) और अंशकालिक कामगारों को सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
विरोध में तर्क
- वित्तीय व्यवहार्यता: यह सबसे बड़ी चुनौती है। जर्मनी के इफो इंस्टीट्यूट या फ्रांस के ओएफसीई (OFCE) जैसे शोध संस्थानों के अध्ययन बताते हैं कि पूर्ण यूबीआई के लिए आयकर में भारी वृद्धि या अन्य सामाजिक खर्चों में कटौती की आवश्यकता होगी।
- प्रवासन पर प्रभाव: आलोचकों का मानना है कि यूरोपीय संघ (ईयू) के भीतर मुक्त आवागमन के साथ, एक देश में यूबीआई लाखों नए प्रवासियों को आकर्षित कर सकता है, जिससे व्यवस्था चरमरा जाएगी।
- सामाजिक राज्य का क्षरण: कई यूरोपीय सामाजिक डेमोक्रेट, जैसे जर्मनी की एसपीडी के कुछ सदस्य, चिंता जताते हैं कि यूबीआई विशिष्ट लक्षित कार्यक्रमों (जैसे बेरोजगारी भत्ता, आवास सहायता) को खत्म कर देगा, जिससे वास्तव में जरूरतमंदों को नुकसान होगा।
- कार्य नैतिकता: एक पुराना लेकिन प्रबल तर्क यह है कि यह समाज में काम करने की प्रेरणा को कमजोर करेगा।
यूरोपीय संघ और राष्ट्रीय सरकारों की भूमिका
यूरोपीय संघ का यूबीआई के प्रति कोई एकीकृत दृष्टिकोण नहीं है, लेकिन यह चर्चा को प्रोत्साहित करता है। यूरोपीय आयोग ने यूरोप 2020 रणनीति और अब यूरोपीय ग्रीन डील के तहत सामाजिक समावेशन पर जोर दिया है। यूरोपीय संसद में, स्टेला क्य्रिअकाइड्स (साइप्रस) और गाय वेरहोफ्स्टैड्ट (बेल्जियम) जैसे सदस्यों ने इस पर रिपोर्टें पेश की हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, पुर्तगाल और आयरलैंड की सरकारों ने आधिकारिक तौर पर यूबीआई की संभावना तलाशने के लिए कमीशन बनाए हैं। फ्रांस में, राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों इसके प्रति उत्साही नहीं हैं, जबकि जीन-ल्यूक मेलेनचों की ला फ्रांस इन्सौमाइस पार्टी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया है।
भविष्य की संभावनाएँ: हाइब्रिड मॉडल और आंशिक यूबीआई
पूर्ण, वास्तविक यूबीआई की राजनीतिक और वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए, यूरोप में भविष्य की राह संभवतः हाइब्रिड या आंशिक मॉडलों की ओर जाती है। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- नकारात्मक आयकर (Negative Income Tax – NIT): एक ऐसी प्रणाली जहाँ एक निश्चित सीमा से कम आय वालों को सरकार से भुगतान मिलता है। यह मिल्टन फ्रीडमैन का विचार था और यह यूके की यूनिवर्सल क्रेडिट से मिलता-जुलता है।
- यूनिवर्सल बेसिक सर्विसेज (UBS): लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के विद्वानों सहित कुछ विचारक नकद के बजाय मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और डिजिटल पहुँच जैसी सेवाओं की गारंटी पर जोर देते हैं।
- सामाजिक लाभांश या संपत्ति कर-आधारित यूबीआई: प्राकृतिक संसाधनों, डेटा उपयोग, या रोबोटिक्स पर लगाए गए करों से प्राप्त राजस्व को नागरिक लाभांश के रूप में वितरित किया जा सकता है। आइसलैंड और नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड इसके प्रारंभिक रूप हैं।
- स्थानीय और क्षेत्रीय यूबीआई: इटली के लिवोर्नो शहर या बेल्जियम के सेंट-जोस-टेन-नूड जैसे शहर अपने स्तर पर छोटे पायलट शुरू कर सकते हैं।
निष्कर्ष: एक विकसित सामाजिक बहस की ओर
यूरोप में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की यात्रा सैद्धांतिक विमर्श से लेकर व्यावहारिक प्रयोगों तक फैली हुई है। फिनलैंड, स्पेन, नीदरलैंड्स और जर्मनी के प्रयोगों ने बहुमूल्य डेटा प्रदान किया है जो अक्सर पूर्वाग्रहों का खंडन करता है। यह स्पष्ट है कि यूबीआई लोगों को ‘आलसी’ नहीं बनाता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, रचनात्मकता और सामाजिक सहभागिता में सुधार कर सकता है। हालाँकि, वित्तपोषण और राजनीतिक इच्छाशक्ति की बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भविष्य में, हम यूरोप में पूर्ण यूबीआई के बजाय सार्वभौमिक बेसिक सेवाओं, लक्षित नकद हस्तांतरण, और सामाजिक सुरक्षा के सरलीकृत मॉडलों के संयोजन को देखने की संभावना रखते हैं। जैसे-जैसे चौथी औद्योगिक क्रांति आगे बढ़ेगी, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा प्रस्तावित ‘सामाजिक यूरोप’ का सपना यूबीआई जैसे मौलिक विचारों पर गंभीर विचार के बिना पूरा नहीं हो सकता। यह बहस केवल अर्थशास्त्र के बारे में नहीं, बल्कि उस समाज के बारे में है जिसे हम भविष्य में बनाना चाहते हैं।
FAQ
यूरोप में अब तक का सबसे सफल यूबीआई प्रयोग कौन सा रहा है?
सफलता को परिभाषित करना मुश्किल है, क्योंकि प्रत्येक प्रयोग के अलग लक्ष्य थे। हालाँकि, फिनलैंड का 2017-2018 का प्रयोग सबसे व्यापक रूप से अध्ययन किया गया और इसने महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया। इसने यह मिथक तोड़ा कि यूबीआई लोगों को काम करने से रोकता है और इसने मानसिक कल्याण पर स्पष्ट सकारात्मक प्रभाव दिखाया। स्पेन की ‘मिनिमो वाइटल’ योजना अपने पैमाने और स्थायित्व के कारण सबसे महत्वाकांक्षी है।
क्या यूरोपीय संघ के सभी देश यूबीआई लागू कर सकते हैं?
तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। यूरोपीय संघ सामाजिक नीति पर प्रत्येक सदस्य राज्य की संप्रभुता का सम्मान करता है। इसलिए, यूबीआई को लागू कर
ISSUED BY THE EDITORIAL TEAM
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